मुगलकालीन कला एवं संस्कृति: स्थापत्य, साहित्य और इतिहास का पूरा निचोड़
मुगलकालीन कला एवं संस्कृति: स्थापत्य, साहित्य और इतिहास का पूरा निचोड़ क्या आप जानते हैं कि ताजमहल के बनने से पहले ही उसकी रूपरेखा तैयार हो चुकी थी? या कि मुगल काल में एक ऐसी भी इमारत है जिसे 'ताजमहल की फुहड़ नकल' कहा जाता है? भारतीय इतिहास में मुगल काल (Mughal Era) न केवल युद्धों के लिए, बल्कि अपनी भव्य स्थापत्य कला (Architecture) और समृद्ध साहित्य के लिए भी जाना जाता है। आज के इस विशेष लेख में हम बाबर से लेकर औरंगजेब तक की कलात्मक यात्रा और उनकी महान कृतियों का विस्तृत अध्ययन करेंगे। 1 . मुगल स्थापत्य: इण्डो-पर्शियन शैली का संगम मुगल स्थापत्य कला का इतिहास बाबर से प्रारंभ होता है और शाहजहाँ के काल में अपने चरमोत्कर्ष पर पहुँचता है। विद्वानों ने इस विशिष्ट शैली को इण्डो-पर्शियन शैली की संज्ञा दी है। बाबर और हुमायूँ: नींव का दौर बाबर: पानीपत की काबुली मस्जिद और रुहेलखण्ड की सम्भल मस्जिद के साथ मुगल निर्माण की शुरुआत की। हुमायूँ: दिल्ली में दीनपनाह नगर (पाँचवीं दिल्ली) की स्थापना की। अकबर: प्रयोगों का काल अकबर ने भारतीय और ईरानी शैलियों का अद्भुत मेल किया। हुमायूँ का म...